What is a Stop-Loss Order? | Importance & Limitations
मित्र,
स्टॉप लॉस शब्द से ही साफ है कि ऐसा तरीका जिससे हो रहे नुकसान को रोका जाय।
हम सभी जानते हैं किसी भी स्टॉक,इंडेक्स,कमोडिटी,करेंसी बाजार का मूवमेंट न तो सीधे ऊपर की तरफ और न ही सीधे नीचे की तरफ होता है। ऐसे में विपरीत मूवमेंट के समय होनेवाली बड़ी नुकसान को रोकने के लिए स्टॉप लॉस का उपयोग किया जाता है।
मान लीजिए किसी स्टॉक का प्राइस आज के बाजार में 700 पर ओपन हुआ है और हमने भी इसे उसी प्राइस के आसपास 100 शेयर खरीद लिया। अब हमने स्टॉक को खरीदा है तो प्राइस 700 से जितना बढ़ेगा उतना हमें प्रॉफिट होगा और यह 700 के जितना नीचे जाएगा ..उतना हमें नुकसान होगा। दूसरी चीज हम जानते हैं कि बाजार के ज्यादेतर स्टॉक में अपर या लोअर सर्किट 20 फीसदी का होता है। अर्थात शेयर 20 फीसदी तक ऊपर भी जा सकता है और सेम 20 फीसदी तक गिरावट भी दिखा सकता है।
ऐसे में यदि हम जितने पॉइंट या जितनी फीसदी का स्टॉप लॉस लगाएंगे ..हमारा ट्रेड उतनी ही फीसदी पर हमें ट्रेड से बाहर कर देगा।
उदाहरण के लिए हमने स्टॉक में 1 फीसदी का स्टॉप लॉस लगाया था। यानी 7 रुपये का।
अब स्टॉक भले ही 20 फीसदी यानी 140(7*20) पॉइंट भी गिरे तो भी हमारा ट्रेड 7 रुपये प्रति शेयर के नुकसान के साथ ही बाहर हो जाएगा।
उम्मीद है स्टॉप लॉस आपको समझ मे आया होगा। पोस्ट उपयोगी है तो upvote अवश्य करें। बाजार से जुड़े जानकरी के लिए हमें फॉलो करें। टेक्निकल एनालिसिस सीखने के लिए whatsapp 7321947248 पर जुड़ें।
धन्यवाद